LUKE 7:47 SERMON - लूका 7:47 पर प्रवचन

 

लूका 7:47 पर प्रवचन




पद:

"इस कारण मैं तुम से कहता हूँ कि इसके बहुत पाप क्षमा किए गए हैं, क्योंकि इस ने बहुत प्रेम किया; परन्तु जिस का थो‍़ड़ा क्षमा किया जाता है, वह थो‍़ड़ा प्रेम करता है।" — लूका 7:47

भूमिका:

यह पद हमें मसीह की क्षमा की महानता और प्रेम की गहराई का संदेश देता है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि जो क्षमा प्राप्त करता है, वह अपने जीवन में अद्वितीय प्रेम प्रकट करता है। इस प्रवचन में हम इस पद के तीन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे: (1) क्षमा की गहराई, (2) प्रेम की अभिव्यक्ति, और (3) मसीह के प्रति हमारी प्रतिक्रिया।


1. क्षमा की गहराई

यीशु ने यह शब्द उस स्त्री के लिए कहे जिसने उनके चरणों को अपने आँसुओं से धोया और सुगंधित तेल से अभिषेक किया। यह स्त्री एक पापिनी मानी जाती थी, और समाज में उसका आदर नहीं था।

(क) पाप की गम्भीरता:

पाप हमें ईश्वर से दूर कर देता है। रोमियों 3:23 में लिखा है, “सभी ने पाप किया है और ईश्वर की महिमा से रहित हो गए हैं।” उस स्त्री का जीवन पाप से भरा था, लेकिन उसने यीशु की ओर अपने हृदय को मोड़ा।

(ख) ईश्वर की क्षमा का स्वरूप:

भजन 103:12 कहता है, “जितनी दूर पूरब पश्चिम से है, उतनी दूर उसने हमारे अपराधों को हम से दूर कर दिया है।” मसीह की क्षमा हमारी सभी कमजोरियों और पापों को मिटा देती है।

(ग) क्षमा की उपलब्धता:

1 यूहन्ना 1:9 में लिखा है, “यदि हम अपने पापों को स्वीकार करते हैं तो वह विश्वासयोग्य और धर्मी है, और हमारे पापों को क्षमा करेगा।” यह स्त्री यीशु के पास आई क्योंकि उसने समझा कि केवल वही उसे सच्ची क्षमा दे सकते हैं।


2. प्रेम की अभिव्यक्ति

यीशु ने कहा, “क्योंकि इसने बहुत प्रेम किया।” प्रेम वह प्रतिक्रिया है जो सच्ची क्षमा से उत्पन्न होती है।

(क) प्रेम की पहचान:

उस स्त्री ने अपने कार्यों के द्वारा अपने प्रेम को प्रकट किया। उसने:

  1. अपने आँसुओं से यीशु के चरण धोए।

  2. अपने बालों से चरण पोंछे।

  3. सुगंधित तेल से अभिषेक किया।

(ख) बलिदान:

उसने सुगंधित तेल खर्च किया, जो उसके लिए मूल्यवान था। जब हम मसीह से प्रेम करते हैं, तो हम अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ उन्हें अर्पित करते हैं।

(ग) प्रेम का प्रतीक:

1 कुरिन्थियों 13:13 कहता है, “अब विश्वास, आशा, और प्रेम ये तीनों बने रहते हैं; लेकिन इनमें सबसे बड़ा प्रेम है।” यह स्त्री अपने प्रेम को कर्मों के माध्यम से प्रकट करती है।


3. मसीह के प्रति हमारी प्रतिक्रिया

(क) नम्रता:

हमारे पाप हमें नम्र बनाते हैं, और हमें मसीह के पास ले जाते हैं। वह स्त्री नम्रता से यीशु के चरणों में गिर पड़ी।

(ख) आभार:

जब हम समझते हैं कि मसीह ने हमारे लिए क्या किया है, तो हमारा हृदय कृतज्ञता से भर जाता है।

(ग) परिवर्तन:

यीशु से मिलने के बाद वह स्त्री बदल गई। 2 कुरिन्थियों 5:17 में लिखा है, “जो मसीह में है, वह नई सृष्टि है। पुरानी बातें बीत गईं; देखो, सब कुछ नया हो गया है।”


शिक्षा:

(क) समाज के बहिष्कृत लोगों को अपनाना:

यीशु ने उस स्त्री को अपनाया जिसे समाज ने तिरस्कृत किया था। हमें भी प्रेम और करुणा से दूसरों को अपनाना चाहिए।

(ख) क्षमा का महत्व:

हमारी आत्मा को शुद्ध करने के लिए क्षमा आवश्यक है। ईश्वर की क्षमा हमें नया जीवन देती है।

(ग) प्रेम में वृद्धि:

जिसे अधिक क्षमा मिली, वह अधिक प्रेम करता है। यह हमें अपने प्रेम को यीशु और दूसरों के प्रति प्रकट करने की प्रेरणा देता है।


निष्कर्ष:

लूका 7:47 का यह पद हमें सिखाता है कि मसीह की क्षमा कितनी महान है और उसका उत्तर हमें प्रेम के द्वारा देना चाहिए। जब हम मसीह के प्रति अपने पापों को स्वीकार करते हैं और उनकी क्षमा को ग्रहण करते हैं, तो हमारा जीवन बदल जाता है। आइए, हम भी उस स्त्री की तरह प्रेम और कृतज्ञता के साथ मसीह के चरणों में झुकें और अपने जीवन में उनकी महिमा करें।

प्रार्थना: "हे प्रभु यीशु, हम आपके अनुग्रह और क्षमा के लिए धन्यवाद देते हैं। हमें नम्रता और प्रेम के साथ आपका अनुसरण करने की शक्ति दें। आमीन।"



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